चांद पर रात होती है बेहद खतरनाक, कुछ सेकेंड भी जिंदा नहीं रह पाएगा इंसान
चांद पर रात होती है बेहद खतरनाक, कुछ सेकेंड भी जिंदा नहीं रह पाएगा इंसान
अगर पृथ्वी के दिन-रात और तापमान की बात करें तो ये चंद्रमा से एकदम अलग होते हैं. जब पृथ्वी का एक महीना पूरा होता है तब चांद पर एक दिन खत्म होता है. यहां की रात पृथ्वी की 14 रातों जितनी लंबी होती है
नई दिल्ली. जापान (Japan) की एक मूवी आई थी "डिस्ट्रॉय ऑल मॉनस्टर्स", ये क्लासिक साइंस फिक्शन (Science Fiction) मूवी थी, जिसमें कल्पना की गई थी कि 1999 तक मनुष्य चांद (Moon) पर कॉलोनी बनाकर रहना शुरू कर देगा. खैर, ऐसा तो अब तक हुआ नहीं है. अगर कभी ऐसा हुआ भी तो आसान नहीं होगा. क्योंकि वहां मानव के लिए 15 दिन लंबी रात और 15 दिन के बराबर लंबे दिन का सामना बहुत कठिन होगा.
दरअसल चांद का एक दिन पृथ्वी के करीब 28 दिनों के बराबर होता है. यहां की रात और दिन के तापमान के साथ मौसम में बहुत अंतर आता रहता है. अगर आप ये मानते हों कि पृथ्वी पर ही उत्तरी ध्रुव या उत्तरी गोलार्द्ध के कुछ देशों में बहुत ज्यादा ठंड होती है. तापमान माइनस में बहुत नीचे तक चला जाता है तो यकीन मानिए इस मामले में चांद कई कदम आगे है.
चांद के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के हालात में बहुत अंतर कहा जाता है कि चांद के उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव के नेचर में बहुत अंतर है. लिहाजा दोनों की रात, तापमान में भी अंतर बताया गया है. चांद का एक हिस्सा ऐसा भी है, जो कभी पृथ्वी का सामना नहीं करता, यहां आमतौर पर कम रोशनी होती है.
चांद जब अपनी कक्षा में 360 डिग्री घूमते हुए पृथ्वी की एक परिक्रमा करता है, तो उसमें उसे 27.32 दिन लगते हैं. ऐसे में पहले एक हिस्सा काफी समय तक पृथ्वी की ओर होता है. फिर यही हाल चांद के दूसरे हिस्से का होता है.
रात में तापमान गिरता जाता है
पृथ्वी पर एक दिन चौबीस घंटे का होता है. उसमें 12 घंटे का दिन और 12 घंटे की रात होती है. वहीं चांद पर एक दिन करीब 14 दिन का होता है. रात भी इतनी लंबी होती है. लिहाजा चांद की सतह पर मौजूद वस्तुओं पर रात और दिन का बहुत असर होता है. रात में चांद का तापमान लगातार गिरता है. दिन में तापमान लगातार बढ़ता है.
फिर चांद के अलग अलग हिस्सों की स्थितियां भी अलग हैं. माना जाता है कि चांद का साउथ पोल ज्यादा ठंडा होता है. रातें तो इतनी ठंडी होती हैं कि पृथ्वी का कोई भी मनुष्य शायद वहां उन हालात में रह पाए. बस्तियां बनाने की कल्पना तो दूर की बात है.
जब भारत ने अपने चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम को वहां सात सितंबर को उतारा तो यूं ही इस दिन का चयन नहीं किया गया था बल्कि इसके पीछे पूरी गणना थी, क्योंकि उसी दिन चांद पर दिन की शुरुआत हो रही है. दिन में लैंडर को अपना काम करने में सुविधा होती. मौसम भी साथ देते
रात ठंडी होने के साथ बर्फीली होती है
अगर वैज्ञानिकों की मानें तो चांद के साउथ पोल पर तापमान दिन में भी ज्यादा गर्म नहीं होता लेकिन रातें बहुत ठंडी होती हैं. समय गुजरने के साथ ये गिरता है. हर ओर बर्फ जमने लगती है. ठंडे अंधड़ चलते हैं. ये इस क्षेत्र में रहने की स्थितियों को और दुरुह बना देते हैं. इन्हीं दुश्वारियों के चलते चांद पर अब जितने भी मिशन गए हैं, वो सब उत्तरी इलाके में गए हैं.
चांद की एक रात पृथ्वी की 14 रातों के बराबर होती है. चांद का एक दिन हमारे 27-28 दिन के बराबर
तापमान माइनस 200 डिग्री के पास पहुंच जाता है
समय गुजरने के साथ तापमान माइनस 200 से नीचे चला जाता है. इस तापमान में कोई भी चीज बच नहीं पाती. लेकिन ये भी कहा जाता है कि ये वो इलाका है जहां पानी मिलने की संभावना है. यहां कुछ ऐसे गहरे क्रेटर हैं, जिसमें गहराई में पानी है. वैसे इस क्षेत्र में कुछ क्रेटर्स इतने गहरे भी हैं कि वहां शायद कभी सूर्य की रोशनी पहुंची नहीं.
उत्तरी पोल में ठंड अपेक्षाकृत कम
उत्तरी पोल में तापमान रात में अपेक्षाकृत कम ठंडा होता है. वैसे ये इलाका शुष्क और धूल वाला है. अब आइए चांद के दिन के तापमान की बात करते हैं. दिन में यहां का तापमान गर्म हो जाता है, जो 260 डिग्री फारेनहाइट यानि 127 डिग्री सेल्शियस तक हो जाता है, ये तब होता है जब चांद पर सूरज की रोशनी लगातार पड़ती है.
चांद के साउथ पोल वाले इलाके में कुछ क्रेटर्स ऐसे हैं जहां कभी सूरज की रोशनी नहीं पहुंच पाती
शुक्र है कि चांद पर गए किसी भी एस्ट्रोनॉट ने चांद के इस तापमान को नहीं झेला. नासा के अपोलो मिशन ने सबसे पहले नील आर्मस्ट्रांग को चांद पर भेजा. उसके बाद 1969 से 1972 के बीच 11 अन्य लोग भी वहां पहुंचे. लेकिन ये तभी पहुंचे, जब चांद पर सुबह हो चुकी थी.
चांद पर क्यों नहीं होते मौसम?
परिक्रमा के दौरान चांद अपनी धुरी पर सिर्फ 1.54 डिग्री तक तिरछा होता है जबकि पृथ्वी 23.44 डिग्री तक. इस वजह से दो बातें होती हैं. एक यह कि चांद पर पृथ्वी की तरह मौसम नहीं बदलते और दूसरी बात ये कि चांद के ध्रुवों पर ऐसे कई इलाके हैं जहां कभी सूरज की रोशनी या किरणें पहुंच ही नहीं पातीं.
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