जानिए हर साल चंद्रमा धरती से कितना खिसक रहा है

जानिए हर साल चंद्रमा धरती से कितना खिसक रहा है और क्यों
नासा (NASA) का कहना है कि चंद्रमा (Moon) हमारी पृथ्वी (Earth) से हर साल 1.5 इंच दूर जा रहा है इसका बड़ा असर करोड़ों साल बाद दिखाई देगा.
क्या हमारा चांद हमसे एक दिन बहुत दूर चला जाएगा. यह आशंका नासा के एक तथ्य की पुष्टि से पैदा हुई है. नासा के मुताबिक हमारा चांद हर साल हमें 1.5 इंच दूर जा रहा है. वैसे तो यह बाद चांद तारों के मुकाबले में बहुत छोटी सी लगती है, लेकिन उतना सीधा और स्पष्ट मामला है नहीं जितना कि लगता है.

करोड़ों साल लग जाएंगे

अगर इसी तथ्य की बात की जाए तो चांद को हमसे बहुत दूर जाने में करोड़ों साल लग सकते हैं. लेकिन तब तक काफी कुछ बदल जाएगा और न तो हमारी धरती वैसी रह पाएगी जैसी आज है और न ही सूर्य उसे ऐसा रहने देगा. लेकिन क्या यह बात नजरअंदाज करने लायक है. ऐसा क्यों हो रहा है और इसका असर होगा, खगोलविद इसका भी अध्ययन कर रहे हैं.

चांद का खासा असर होता है धरती पर

चांद की गुरुत्वाकर्षण शक्ति पृथ्वी पर खासा असर डालती है इसकी वजह से पृथ्वी की अपनी धुरी पर घूमने की गति पर असर होता है. वहीं पृथ्वी के गुरुत्व के कारण चांद की कक्षा पर भी असर होता है. इसका असर हम ज्वार भाटा जैसी गतिविधियों में देख पाते हैं. इसका एक असर यह भी है कि चंद्रमा पृथ्वी से हर साल 1.5 इंच दूर जा रहा है.

अगले 50 अरब साल बाद चांद का पृथ्वी से दूर होना रुक जाएगा.
अगले 50 अरब साल बाद चांद का पृथ्वी से दूर होना रुक जाएगा.

तो क्या होगा इसका अंजाम

अगले 50 अरब साल बाद स्थिति कुछ यूं हो जाएगी कि चंद्रमा की कक्षा बहुत बड़ी होने के बाद उससे बड़ी होना बंद हो जाएगी. चंद्रमा का पृथ्वी की एक परिक्रमा और उसका खुद का अपना एक चक्कर दोनों ही 47 दिन के हा जाएंगे. यहां पर चांद और पृथ्वी के सिस्टम में एक समन्वय आ जाएगा. दोनों का एक दूसरे पर ज्वार भाटा जैसा कोई असर नहीं होगा और तब चंद्रमा पृथ्वी से दूर जाना बंद हो जाएगा. यह शायद कभी मुमकिन न हो क्योंकि तब तक पृथ्वी और चांद को हमारा सूर्य नष्ट कर चुका होगा.

शुरुआत में कुछ और ही था हाल दोनों का

जब चंद्रमा बना था,उस समय पृथ्वी पर एकदिन केवल 5 घंटे का हुआ करता था. चंद्रमा के असर के कारण ही 4.5 अरब साल बाद पृथ्वी की एक दिन 24 घंटे हो पाया है. शायद पृथ्वी का कोई चांद ही न होता अगर 4.5 अरब साल पहले पृथ्वी की एक और ग्रह के आकार के पिंड से टक्कर ना हुई होती. उस टकराव से बने टुकड़ों से चंद्रमा का निर्माण हुआ.

तो फिर कैसे दूर जा रहा है चांद

चांद के गुरुत्वाकर्षण के कारण एक प्रक्रिया होती है टाइडल फ्रिक्शन. इसके कारण पृथ्वी समुद्रों में ज्वार भाटा की घटानाएं होताी हैं. इसी शक्ति के कारण पृथ्वी फूलती है और अपने आकार में वापस आती है. और इसी के कारण पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से चंद्रमा को हलका बल लगता है जिससे उसकी कक्षा की गति बढ़ जाती है और चांद धीरे धीरे हमसे थोड़ा सा दूर हो जाता

चंद्रमा का निर्माण एक ग्रह जितने बड़े पिंड के पृथ्वी से टकराने पर हुआ था.

एक मत यह भी है

बहुत से वैज्ञानिकों को लगता है कि चांद का पृथ्वी पर ज्यादा असर हुआ होगा जितना कि सोचा जा रहा था. एक दिलचस्प सिद्धांत यह भी दिया जा रहा है कि पृथ्वी और चंद्रमा के सिस्टम कीवजह से ही पृथ्वी पर जीवन पनपा. इस सिस्टम के कारण ही पृथ्वी पर पौधों और जानवरों के रहने की अनुकूल परिस्थितियां बनीं.और क्योंनासा (NASA) का कहना है कि चंद्रमा (Moon) हमारी पृथ्वी (Earth) से हर साल 1.5 इंच दूर जा रहा है इसका बड़ा असर करोड़ों साल बाद दिखाई देगा.

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